मौन की ठंडी अनंत काल हमेशा कल देखने को मिलेगी। जहां आपकी आंखें उस रेगिस्तानी समुद्र तट पर छिपती हैं, जहां त्वचा आंखों के अस्तित्व के सबसे छिपे हुए हिस्से में एकजुट होती है, जिसका गुरुत्वाकर्षण स्थापित पीड़ा की उर्वरता को आकर्षित करता है, खुद को अलग-थलग कर देता है। दर्द की अपनी अनंत स्थिरता में जो स्वयं भटकते बहते स्वर्ग की निरंतर सतर्कता के भीतर अलग हो जाता है